Sunday, 17 November 2013

સાચું બોલવું પણ જરૂરી,જીવવું પણ જરૂરી,
પણ ધૂનમાં ને ધૂનમાં ગાંધી ન બની જતો.
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તું જિંદગી છે મારી દૂર ન થઇ જા,
જોજે અભિમાનમાં હૂર ન થઇ જા.
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રોજ ઘટાઓ કાળી લખજે,
બધા હાથમાં તાળી લખજે.
જીવન છે મધુવનની મસ્તી,
ઘરવાળી સાથે સાળી લખજે.
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શક્ય છે કે સફર થઇ જાય આસાન,
ચાલ સાથે ચાલીને તો જોઈએ.
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તું જો જાનવર હોત તો બધા ખરીદી લેત,
અહીં માણસની કિમત ન ક્યારે હતી ન છે.
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-કૃષ્ણકાંત ભાટિયા 'કાન્ત'
जब पति युध्ध में जाता था तब भारत वर्ष कि नारी कहती थी ,
'मरना या मारना पीठ मत बताना पतिराज,मेरी सखियाँ ताना 
देंगी कि ये तो कायर नर की नार। '
और आज इस पुलिस अधिकारी से इसकी बीबी ने ये कहा होगा ,
'झुकना ज़ुक जाना पैर में पड़कर गिर जाना 
मगर रिश्वत लिए बिना वापिस घर मत आना। '
नेता की बीबी ने नेताजी से कहा होगा ,'पतिराज,पावर को कभी
कम मत करना ,इंसान तो क्या भगवान से भी मत डरना। बस
इसी तरह राजनीती में दबंग बने रहना। '