69 वीं साल-गिरह !
कल रात एक सितारा ,मुझे चूमकर कह गया,
भाई ! मेरी ओर से तुम्हारी 69 वीं साल-गिरह मुबारक !
मैंने कहा , धन्यवाद दोस्त, ज़िंदगी का ये सफ़र
यूँ ही गुजरा है ,बहुत खुश हूँ,आज भी मेरे आँगन में
money plant नहीं तुलसी का पौधा है, अपने आप से
किया मैंने सच्चाई का सौदा है !
खुद हँसता हूँ,दूसरों को हसाने का हौंसला रखता हूँ !
मैंने अपने आपको कभी नहीं खोया है,
हर जन्म दिन पर एक छोटा सा पौधा बोया है !
मुझे मिली है जिंदगानी,कविता की रवानी,
मेरी गज़ल भी लगती है बड़ी सयानी !
दिल ना- उम्मीद नहीं-नाकाम नहीं ,लंबी है शाम
लेकिन गम की शाम नहीं !
मैं सोचता हूँ ,आने में लम्हा गुज़रे ,जाने में
ये ज़िंदगी गुज़र जाये। हर साल-गिरह मुझे कुछ न कुछ
सिखा जाए !
दोस्त अभी तो बहुत जीना है,हर हर गंगे का पानी पीना है !
चलना है..मचलना है ,सजना है, किसीको सजाना है
ढ़ेर सारे गाने गाना है !
बस यूँ ही मुस्कराना है ! तुझे कविता सुनाना है !
सितारा बोला : सो साल जियो ,ज़िंदगी भर भर के पियो ,
मेरी उम्र तुझे लग जाए, हर साल तू चाँदनी में नहाये !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
कल रात एक सितारा ,मुझे चूमकर कह गया,
भाई ! मेरी ओर से तुम्हारी 69 वीं साल-गिरह मुबारक !
मैंने कहा , धन्यवाद दोस्त, ज़िंदगी का ये सफ़र
यूँ ही गुजरा है ,बहुत खुश हूँ,आज भी मेरे आँगन में
money plant नहीं तुलसी का पौधा है, अपने आप से
किया मैंने सच्चाई का सौदा है !
खुद हँसता हूँ,दूसरों को हसाने का हौंसला रखता हूँ !
मैंने अपने आपको कभी नहीं खोया है,
हर जन्म दिन पर एक छोटा सा पौधा बोया है !
मुझे मिली है जिंदगानी,कविता की रवानी,
मेरी गज़ल भी लगती है बड़ी सयानी !
दिल ना- उम्मीद नहीं-नाकाम नहीं ,लंबी है शाम
लेकिन गम की शाम नहीं !
मैं सोचता हूँ ,आने में लम्हा गुज़रे ,जाने में
ये ज़िंदगी गुज़र जाये। हर साल-गिरह मुझे कुछ न कुछ
सिखा जाए !
दोस्त अभी तो बहुत जीना है,हर हर गंगे का पानी पीना है !
चलना है..मचलना है ,सजना है, किसीको सजाना है
ढ़ेर सारे गाने गाना है !
बस यूँ ही मुस्कराना है ! तुझे कविता सुनाना है !
सितारा बोला : सो साल जियो ,ज़िंदगी भर भर के पियो ,
मेरी उम्र तुझे लग जाए, हर साल तू चाँदनी में नहाये !
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-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '