नया साल !
कुछ इस तरह, नया साल आये,
दूर सुदूर गाँवोंमें, खलिहान मुस्कुराए।
हर आँगन में , रोटी की सुगंध फैले,
पतीली में दाल,पकने की ख़ुशी झेले।
लहालोट आम आदमी झूमकर गाये,
कुछ इस तरह, नया साल आये।
दीप से दीप जले, प्रकाशित हो कुटिया,
गो रस से भरी रहे,किसानों की लुटिया।
हट जाएँ तिरस्कृत करने वाले साये,
कुछ इस तरह , नया साल आये।
यह दिलबरी,यह नाज,अंदाज़ साथ रहे,
प्रेम की गंगा, यारों के दिल में बहे।
आसमान में सितारे यूँ ही झिलमिलायें ,
कुछ इस तरह, नया साल आये।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
कुछ इस तरह, नया साल आये,
दूर सुदूर गाँवोंमें, खलिहान मुस्कुराए।
हर आँगन में , रोटी की सुगंध फैले,
पतीली में दाल,पकने की ख़ुशी झेले।
लहालोट आम आदमी झूमकर गाये,
कुछ इस तरह, नया साल आये।
दीप से दीप जले, प्रकाशित हो कुटिया,
गो रस से भरी रहे,किसानों की लुटिया।
हट जाएँ तिरस्कृत करने वाले साये,
कुछ इस तरह , नया साल आये।
यह दिलबरी,यह नाज,अंदाज़ साथ रहे,
प्रेम की गंगा, यारों के दिल में बहे।
आसमान में सितारे यूँ ही झिलमिलायें ,
कुछ इस तरह, नया साल आये।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '