Saturday, 16 December 2017

आप से 

दोस्ती     निभाना,   कोई    सीखे    तो  आप से,
सबको   गले  लगाना,  कोई   सीखे   तो आप से. 

फन-फ़नकारकी ,  आपकी  परख  लाजवाब   है,
मिट्टी  को सोना  बनाना ,कोई सीखे तो आप से. 

कहने  वाले कहते  रहेंगे ,रंजिशों की कहानियाँ ,
रूठे   हुए  को   मनाना, कोई  सीखे  तो आप से.

अंजुमन में  दिलावर  एक  ही इज़हार करते   हैं ,
दूध में  शक़्कर मिलाना, कोई सीखे तो आप से. 

करीम  की  रहेमियत  के ,  भी   उमीदवार  हो, 
जामे   ऐश    पिलाना,  कोई  सीखे तो आप से.

कोई    दुनिया   से   भला   यावरी   क्यों  माँगे  ?
भटके   को  सँभालना , कोई  सीखे तो आप से.

सिरहाज  भीग   गया  है , बरसते  आँसुओं  से,
रोते    को   हँसाना ,  कोई    सीखे तो  आप  से। 
                               ***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '


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