Saturday, 7 March 2015

औरत हूँ !

माँ,बहन,सास,बहु,भाभी,
मैं औरत हुँ !
कायनात की हुँ मैं  नाभि,
मैं औरत हुँ !
झंकार हुँ जीवन पायल की,
गंगा जमना मैं कायल की !
रंभा,दुर्गा,काली, जो हो भी ,
मैं औरत हुँ !
ज़हर,शूली और गाली खाकर,
रामराज्य के लिए वनमें जाकर !
जशोदा,निर्भया,जनकतनया भी,
मैं औरत हुँ !
सैलाब है मेरी आँखों में,
अहसास है मेरी काँखों में !
रानी लक्ष्मी,रज़िया सुल्ताना,
मैं औरत हुँ !
मनुहार है मेरी इस दुनिया से ,
प्यार करो तुम अपनी मुनिया से !
बेटी,ननद,पोती,भतीजी जो भी हो,
मैं औरत हुँ !
                 ***
-'कान्त '


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