Monday, 5 November 2018

कृपा  !

तेरी  कृपा  बनी  रहे  परवरदिगार  !
सपने    हमारे    हैं  बस   दो -चार !

आंसुओं  से   सींची   है  प्रेम  बेली,
मुसीबतें    हमने   भी   कई  झेलीं।

बजने  लगी  अब  जीवन   सितार !
सपने    हमारे   हैं   बस   दो -चार  !

उजाले  पे  है यहाँ  अँधेरे का पहरा,
दिल  का    घाव    है    बड़ा  गहरा। 

तेरी  कृपा  बरसा  दे  ओ  किरतार !
सपने   हमारे    हैं   बस    दो -चार !

पसरना  खुश्बू    का  , आनंददाता,
तू   मालिक ,तू ही आका -विधाता। 

पतझड़ में  भी अब खिला दे बहार !
सपने     हमारे   हैं   बस    दो-चार !
                     ***
-कृष्णकांत भाटिया  ' कान्त '
'सत्यमविला ',प्लॉट नं। 155 /2 ,
संस्कारनगर ,भुज. 
मो. 99090  71588 


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