कृपा !
तेरी कृपा बनी रहे परवरदिगार !
सपने हमारे हैं बस दो -चार !
आंसुओं से सींची है प्रेम बेली,
मुसीबतें हमने भी कई झेलीं।
बजने लगी अब जीवन सितार !
सपने हमारे हैं बस दो -चार !
उजाले पे है यहाँ अँधेरे का पहरा,
दिल का घाव है बड़ा गहरा।
तेरी कृपा बरसा दे ओ किरतार !
सपने हमारे हैं बस दो -चार !
पसरना खुश्बू का , आनंददाता,
तू मालिक ,तू ही आका -विधाता।
पतझड़ में भी अब खिला दे बहार !
सपने हमारे हैं बस दो-चार !
***
-कृष्णकांत भाटिया ' कान्त '
'सत्यमविला ',प्लॉट नं। 155 /2 ,
संस्कारनगर ,भुज.
मो. 99090 71588
तेरी कृपा बनी रहे परवरदिगार !
सपने हमारे हैं बस दो -चार !
आंसुओं से सींची है प्रेम बेली,
मुसीबतें हमने भी कई झेलीं।
बजने लगी अब जीवन सितार !
सपने हमारे हैं बस दो -चार !
उजाले पे है यहाँ अँधेरे का पहरा,
दिल का घाव है बड़ा गहरा।
तेरी कृपा बरसा दे ओ किरतार !
सपने हमारे हैं बस दो -चार !
पसरना खुश्बू का , आनंददाता,
तू मालिक ,तू ही आका -विधाता।
पतझड़ में भी अब खिला दे बहार !
सपने हमारे हैं बस दो-चार !
***
-कृष्णकांत भाटिया ' कान्त '
'सत्यमविला ',प्लॉट नं। 155 /2 ,
संस्कारनगर ,भुज.
मो. 99090 71588
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