Thursday, 8 November 2018

जन्मदिन....!

आज   मेरा  जन्मदिन... 
1951 से  2018, सडसठ  साल का  सफ़र !
24,455 दिनकी  मेरी  साँसें  आज  भी 
चल  रही  हैं  उसी रफ़्तार से  !
कोई गिला नहीं ,कोई  शिकवा नहीं,
बस  सब कुछ  हो रहा है  यहाँ  सही !
मैं सहज  हो  कर जी रहा  हूँ,
तितली  मेरे  लिए  फूल  है ,फूल  है तितली 
उसे  देख -मैं अमृत  रस पी रहा हूँ !
मेरे  आँगन में  आते  सूर्य  के किरन 
सबेरे  की हवा का  स्पर्श ,श्रीजी चरण  
मुझे  garden garden 
कर देते  है,बदले में कुछ नहीं लेते है !
मैं दूसरों के लिए  व्यस्त  हूँ 
अन्याय  के सामने उठा  शस्त्र  हूँ 
मेरे  होठ  भिक्षापात्र  नहीं  हैं
मेरी जिंदगी का रास्ता  बिल्कुल सही है !
मैं अपने आपको  चाहता हूँ  जी जान से,
फर्क नहीं पड़ता कभी मान अपमान से !
पागल  हूँ  कविता  के प्यार में 
सरगम  के सात सुरों  के  ख्याल में 
मै  रोज  शाम  को  वोक-वे  पे  चलता हूँ 
ढलते  सूरज के साथ  गुफ़्त-गू करता हूँ 
कम  खाता हूँ, अनजाने को भी बुलाता हूँ 
किताबें मेरी  अच्छी दोस्त हैं,उन्हें अपने 
साथ ही जगाता हूँ ! उन्हें  थपथपा  के 
सुलाता हूँ,मैं भी सो जाता हूँ !
आज  यहाँ  हूँ, कल  किसी और द्वार 
इसी तरह  जिंदगी  से करता रहूँ प्यार !
                        ***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '








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