जन्मदिन....!
आज मेरा जन्मदिन...
1951 से 2018, सडसठ साल का सफ़र !
24,455 दिनकी मेरी साँसें आज भी
चल रही हैं उसी रफ़्तार से !
कोई गिला नहीं ,कोई शिकवा नहीं,
बस सब कुछ हो रहा है यहाँ सही !
मैं सहज हो कर जी रहा हूँ,
तितली मेरे लिए फूल है ,फूल है तितली
उसे देख -मैं अमृत रस पी रहा हूँ !
मेरे आँगन में आते सूर्य के किरन
सबेरे की हवा का स्पर्श ,श्रीजी चरण
मुझे garden garden
कर देते है,बदले में कुछ नहीं लेते है !
मैं दूसरों के लिए व्यस्त हूँ
अन्याय के सामने उठा शस्त्र हूँ
मेरे होठ भिक्षापात्र नहीं हैं
मेरी जिंदगी का रास्ता बिल्कुल सही है !
मैं अपने आपको चाहता हूँ जी जान से,
फर्क नहीं पड़ता कभी मान अपमान से !
पागल हूँ कविता के प्यार में
सरगम के सात सुरों के ख्याल में
मै रोज शाम को वोक-वे पे चलता हूँ
ढलते सूरज के साथ गुफ़्त-गू करता हूँ
कम खाता हूँ, अनजाने को भी बुलाता हूँ
किताबें मेरी अच्छी दोस्त हैं,उन्हें अपने
साथ ही जगाता हूँ ! उन्हें थपथपा के
सुलाता हूँ,मैं भी सो जाता हूँ !
आज यहाँ हूँ, कल किसी और द्वार
इसी तरह जिंदगी से करता रहूँ प्यार !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
आज मेरा जन्मदिन...
1951 से 2018, सडसठ साल का सफ़र !
24,455 दिनकी मेरी साँसें आज भी
चल रही हैं उसी रफ़्तार से !
कोई गिला नहीं ,कोई शिकवा नहीं,
बस सब कुछ हो रहा है यहाँ सही !
मैं सहज हो कर जी रहा हूँ,
तितली मेरे लिए फूल है ,फूल है तितली
उसे देख -मैं अमृत रस पी रहा हूँ !
मेरे आँगन में आते सूर्य के किरन
सबेरे की हवा का स्पर्श ,श्रीजी चरण
मुझे garden garden
कर देते है,बदले में कुछ नहीं लेते है !
मैं दूसरों के लिए व्यस्त हूँ
अन्याय के सामने उठा शस्त्र हूँ
मेरे होठ भिक्षापात्र नहीं हैं
मेरी जिंदगी का रास्ता बिल्कुल सही है !
मैं अपने आपको चाहता हूँ जी जान से,
फर्क नहीं पड़ता कभी मान अपमान से !
पागल हूँ कविता के प्यार में
सरगम के सात सुरों के ख्याल में
मै रोज शाम को वोक-वे पे चलता हूँ
ढलते सूरज के साथ गुफ़्त-गू करता हूँ
कम खाता हूँ, अनजाने को भी बुलाता हूँ
किताबें मेरी अच्छी दोस्त हैं,उन्हें अपने
साथ ही जगाता हूँ ! उन्हें थपथपा के
सुलाता हूँ,मैं भी सो जाता हूँ !
आज यहाँ हूँ, कल किसी और द्वार
इसी तरह जिंदगी से करता रहूँ प्यार !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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