सलाम !
ए सिपाही हिन्द के तेरी शुआजत को सलाम ,
तेरी हिम्मत तेरी जुर्रत तेरी ताकत को सलाम !
जान दे दी तूने हँसते हुए अपने वतन के लिए,
तेरे दिल के शोलाए इश्को मोहब्वत को सलाम !
डाल दीं तूने कमंदें अपनी हफ्त अफ़लाक पर,
तेरी अजमत तेरी हशमत तेरी रिफ़अत को सलाम !
तेरा मज़हब कौम है तेरी इबादत कौम है ,
तेरे इस मज़हब को तेरी इस इबादत को सलाम !
शौक से अपने वतन हिन्दोस्तां पर जान दी,
तेरी इस दीवानगी को इस अकीदत को सलाम !
बाद मरने के हयाते जावदां तुझको मिली,
सारी दुनिया कर रही है तेरी तुरबत को सलाम !
जां निसार ऐसे जमीने हिन्द ने पैदा किए ,
या इलाही तेरी कुदरत तेरी सनअत को सलाम !
***
-जिगर जलन्धरी
ए सिपाही हिन्द के तेरी शुआजत को सलाम ,
तेरी हिम्मत तेरी जुर्रत तेरी ताकत को सलाम !
जान दे दी तूने हँसते हुए अपने वतन के लिए,
तेरे दिल के शोलाए इश्को मोहब्वत को सलाम !
डाल दीं तूने कमंदें अपनी हफ्त अफ़लाक पर,
तेरी अजमत तेरी हशमत तेरी रिफ़अत को सलाम !
तेरा मज़हब कौम है तेरी इबादत कौम है ,
तेरे इस मज़हब को तेरी इस इबादत को सलाम !
शौक से अपने वतन हिन्दोस्तां पर जान दी,
तेरी इस दीवानगी को इस अकीदत को सलाम !
बाद मरने के हयाते जावदां तुझको मिली,
सारी दुनिया कर रही है तेरी तुरबत को सलाम !
जां निसार ऐसे जमीने हिन्द ने पैदा किए ,
या इलाही तेरी कुदरत तेरी सनअत को सलाम !
***
-जिगर जलन्धरी
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