शिक्षक हूँ !
करता हुँ नव निर्माण मैं शिक्षक हुँ !
चेतना का परिमाण मैं शिक्षक हुँ !
शिक्षा ही है मेरी जीवन फुलवारी,
कठिन समय में हिम्मत नहीं हारी!
बच्चे ही हैं मेरे प्राण मैं शिक्षक हुँ !
राष्ट्र सम्मान की मैं ही हुँ धरोहर,
मेरा जीवन मीठे जल का सरोवर !
शब्द ही हैं मेरे बाण मैं शिक्षक हुँ !
रूपये नहीं हो शकते मुझ पर हावी,
मैं तो हुँ मेरे हिंदुस्तान का भावी !
तन -मन सब कुर्बान मैं शिक्षक हुँ !
द्रोण-कौटिल्य का मैं ही हुँ वारिस,
अध्यापन की मैं रिमझिम बारिश !
मूल्यों का निगहबान मैं शिक्षक हुँ !
निदिध्यासन में मैं ध्यान लगाऊं,
मेरे कक्षाखंड पर बलि बलि जाउँ !
'फलक' का अभिमान मैं शिक्षक हुँ !
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-कृष्णकांत भाटिया 'फलक'
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