Thursday, 4 September 2014

शिक्षक हूँ !

करता हुँ नव निर्माण मैं शिक्षक हुँ !
चेतना का  परिमाण  मैं शिक्षक हुँ !

शिक्षा ही है मेरी  जीवन  फुलवारी,
कठिन समय में हिम्मत नहीं हारी!
बच्चे ही हैं मेरे प्राण मैं शिक्षक  हुँ !

राष्ट्र सम्मान की  मैं ही हुँ धरोहर,
मेरा जीवन मीठे जल का  सरोवर !
शब्द ही हैं मेरे बाण मैं शिक्षक  हुँ !

रूपये नहीं हो शकते मुझ पर हावी,
मैं  तो हुँ मेरे हिंदुस्तान का   भावी !
तन -मन सब कुर्बान मैं शिक्षक हुँ !

द्रोण-कौटिल्य का मैं ही हुँ  वारिस,
अध्यापन की मैं रिमझिम बारिश !
मूल्यों का निगहबान मैं शिक्षक हुँ !

निदिध्यासन में मैं  ध्यान  लगाऊं,
मेरे  कक्षाखंड पर  बलि बलि जाउँ  !
'फलक' का अभिमान मैं शिक्षक हुँ !
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-कृष्णकांत भाटिया 'फलक'
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