Tuesday, 3 September 2019

मैं  शिक्षक  हूँ  !

करता   हूँ   नवनिर्माण ,मैं शिक्षक  हूँ !
देश  का   हूँ  अभिमान, मैं  शिक्षक हूँ !

यहाँ  सजाता   मैं,बच्चों  की फुलवारी,
बागबान   बनने    की  मेरी है तैयारी।  

माँ  शारदा का  वरदान, मैं शिक्षक हूँ !
देश का  हूँ   अभिमान  मैं   शिक्षक हूँ ! 

शिक्षा  मेरा बल, ज्ञान का  उद्वीपक ,
निरंतर  फैलते  प्रकाशका   मैं दीपक। 

अटल  मेरा   सम्मान,  मैं शिक्षक हूँ !
देश  का  हूँ  अभिमान, मैं शिक्षक  हूँ !

परशुराम-विश्वामित्र का ,मैं   वंशज ,
जलकमलवत   रहूँ ,   हूँ   मैं  पंकज। 

झेल  लेता  हूँ  तूफ़ान, मैं  शिक्षक हूँ !
देश  का  हूँ  अभिमान, मैं शिक्षक हूँ !

छात्र  मेरी साधना,विद्या  मेरा  तप,
पाठशाला मेरी माला, वर्ण  मेरे जप। 

मेरे  वश  में   विज्ञान , मैं शिक्षक हूँ !
देश का  हूँ  अभिमान, मैं  शिक्षक हूँ !
                       ***
-कृष्णकांत 'भाटिया 'कान्त '






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