मैं शिक्षक हूँ !
कोई एवॉर्ड -पुष्प हार का मोहताज़ नहीं था
नहीं हूँ.....
चाणक्य का वारिस मैं शिक्षक हूँ !
चल पड़ा था शिक्षा की राह पर ,
बच्चों की फुलवारी की तरफ
तभी ठान ली थी कुछ करने की ख्वाहिश !
मेरे जीवन के ४० साल बीत गये
प्राथमिक कक्षा में पढ़ाते हुए...
किन्ह लम्हों को याद करुँ ,किसे भूलूँ...???
मेरा वो नन्हा-मुन्ना छात्र ...
अब आर्किटेक बन गया है ,बड़े बड़े मोल
बनाता है.... एक दिन fb पर मिलता है -कहता है
'sir ! पहचानते हो मुझे ? आपने ही इस काबिल बनाया
जिंदगी की इस डगर तक पहुँचाया....
पुलिस में S.P. पद पर कार्यानवित् मुन्ना
रास्ते में मिल जाता है ,अपनी कार से नीचे उतरकर
मेरे पाँव छूता है.. रिक्षा चलानेवाला
मेरा विद्यार्थी मुझे अपनी रिक्षा में गर्व से बिठाता है
तब सारे अवॉर्ड मुझे फीके लगते हैं !
मैं सोचता हूँ..... मेरे अध्यापन काल में मैंने कोई
मान-अकरम स्वीकार नहीं कर के अच्छा किया
आज मेरे पास पढ़नेवाला हर विद्यार्थी मेरे
लिए 'भारत रत्न ' से कम नहीं है
आज भी आठवीं कक्षा में पढ़ी कहानी
'Shadow and Light ' मुझे बराबर याद है.....
शिक्षक शिक्षक होता है, बच्चों की आंखों में
वो सपने सँजोता है..... मैंने भी कुछ ऐसे ही
सपनों के सितारे संजोये मेरे विद्यार्थिओं की आँखों में
वो ही 'तारे जमीन पर ' उतर आये हैं ,चमक कर
कह रह हैं 'तुम शिक्षक हो.... तुम शिक्षक हो.... !'
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
कोई एवॉर्ड -पुष्प हार का मोहताज़ नहीं था
नहीं हूँ.....
चाणक्य का वारिस मैं शिक्षक हूँ !
चल पड़ा था शिक्षा की राह पर ,
बच्चों की फुलवारी की तरफ
तभी ठान ली थी कुछ करने की ख्वाहिश !
मेरे जीवन के ४० साल बीत गये
प्राथमिक कक्षा में पढ़ाते हुए...
किन्ह लम्हों को याद करुँ ,किसे भूलूँ...???
मेरा वो नन्हा-मुन्ना छात्र ...
अब आर्किटेक बन गया है ,बड़े बड़े मोल
बनाता है.... एक दिन fb पर मिलता है -कहता है
'sir ! पहचानते हो मुझे ? आपने ही इस काबिल बनाया
जिंदगी की इस डगर तक पहुँचाया....
पुलिस में S.P. पद पर कार्यानवित् मुन्ना
रास्ते में मिल जाता है ,अपनी कार से नीचे उतरकर
मेरे पाँव छूता है.. रिक्षा चलानेवाला
मेरा विद्यार्थी मुझे अपनी रिक्षा में गर्व से बिठाता है
तब सारे अवॉर्ड मुझे फीके लगते हैं !
मैं सोचता हूँ..... मेरे अध्यापन काल में मैंने कोई
मान-अकरम स्वीकार नहीं कर के अच्छा किया
आज मेरे पास पढ़नेवाला हर विद्यार्थी मेरे
लिए 'भारत रत्न ' से कम नहीं है
आज भी आठवीं कक्षा में पढ़ी कहानी
'Shadow and Light ' मुझे बराबर याद है.....
शिक्षक शिक्षक होता है, बच्चों की आंखों में
वो सपने सँजोता है..... मैंने भी कुछ ऐसे ही
सपनों के सितारे संजोये मेरे विद्यार्थिओं की आँखों में
वो ही 'तारे जमीन पर ' उतर आये हैं ,चमक कर
कह रह हैं 'तुम शिक्षक हो.... तुम शिक्षक हो.... !'
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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