------------------नारी --------------------
घूंघट हटाकर पति की अर्थी को कंधा देती हैं ,
ऐसी नारियाँ भारत मैं ही जन्म लेती हैं
लक्ष्मीबाई, जीजाबाई का है ये देश
कुल की मर्यादा और लज्जा ही है इनका परिवेश।
वक्त आये तो ये तलवार ताने रन मैं भी आती हैं
मौका मिले तो ये वतन पे जान कुर्बान कर जाती हैं।
सहन शीलता की मूरत हैं ये मासूमियत की सूरत हैं ये
जानकी बनके राम के साथ वन में भी चली जाती हैं
उर्मिला की तरह १४ साल स्तंभ बनकर खड़ी भी रह जाती हैं।
सत्य पथ पर साथ देती हैं ये पति का
युद्ध पथ पर रिश्ता निभाती हैं ये सती का
तारामती बनके श्मशान घाट पे बिक जाती हैं
कैकेयी होकर रथ का पहिया भी संभालती हैं।
माँ -बहन-बेटी-पत्नी -सास-बहु -कोई भी रूप हो
मेनका-शकुंतला-कौशल्या-सीता-कोई भी स्वरूप हो
हर रूप हर स्वरूप में ये हिना की तरह मिट जाती हैं।
ये भारतीय नारियाँ हैं 'फलक' नर को जीवन देने के लिए
अक्सर ये खुद सिमट जाती हैं।
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