गीत !
भारत माता के चरणों में पहले मैं प्रणाम लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे मीठे गान लिखूँ !
हुआ सवेरा जागा भारत, सागर माँ के पाँव पखारे,
वंदे मातरम -वंदे मातरम गीत मधुर वो ललकारे।
सारे जहाँ में शांति -अमन का ,बापू का पैगाम लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे-मीठे गान लिखूँ !
पूरव -पश्चिम -उत्तर -दक्षिण ,जाग रहा है मेरा भारत,
सत्य -मेव-जयते की गूँज ,माँग रहा है मेरा भारत।
शहीद भगतसिंह के गले के रस्सी के निशान लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे मीठे गान लिखूँ !
नया उजाला -नई दिशाएँ ,आओ देश को हम सँवारें ,
प्रेम की भाषा -बहतर आशा-गिरायें नफरत की दीवारें।
नरेंद्र की कल्पना का मैं नया हिंदुस्तान लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे मीठे गान लिखूँ !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
भारत माता के चरणों में पहले मैं प्रणाम लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे मीठे गान लिखूँ !
हुआ सवेरा जागा भारत, सागर माँ के पाँव पखारे,
वंदे मातरम -वंदे मातरम गीत मधुर वो ललकारे।
सारे जहाँ में शांति -अमन का ,बापू का पैगाम लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे-मीठे गान लिखूँ !
पूरव -पश्चिम -उत्तर -दक्षिण ,जाग रहा है मेरा भारत,
सत्य -मेव-जयते की गूँज ,माँग रहा है मेरा भारत।
शहीद भगतसिंह के गले के रस्सी के निशान लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे मीठे गान लिखूँ !
नया उजाला -नई दिशाएँ ,आओ देश को हम सँवारें ,
प्रेम की भाषा -बहतर आशा-गिरायें नफरत की दीवारें।
नरेंद्र की कल्पना का मैं नया हिंदुस्तान लिखूँ !
सोने की चिड़िया पे फिर मैं मीठे मीठे गान लिखूँ !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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