माँ !
प्रेम का स्वीकार है तू माँ !
ममता का अवतार है तू माँ !
तेरी गोद में ऋचाऍ खेलें,
निराकार में आकार है तू माँ !
संबंध हैं समर्पित तुझ में,
बच्चों का दुलार है तू माँ !
लड़कपन को हरा-भरा रख्खे,
करुणा का भंडार है तू माँ !
रंग-नूर और ख़ुश्बू से भरी हुई,
गुलशन की बहार है तू माँ !
क़ायनात की सीमा से आगे,
खुद; असीम विस्तार है तू माँ !
नाम तेरा; जब लब पे आये,
'कान्त'की नवकार है तू माँ !
***
-'कान्त '
प्रेम का स्वीकार है तू माँ !
ममता का अवतार है तू माँ !
तेरी गोद में ऋचाऍ खेलें,
निराकार में आकार है तू माँ !
संबंध हैं समर्पित तुझ में,
बच्चों का दुलार है तू माँ !
लड़कपन को हरा-भरा रख्खे,
करुणा का भंडार है तू माँ !
रंग-नूर और ख़ुश्बू से भरी हुई,
गुलशन की बहार है तू माँ !
क़ायनात की सीमा से आगे,
खुद; असीम विस्तार है तू माँ !
नाम तेरा; जब लब पे आये,
'कान्त'की नवकार है तू माँ !
***
-'कान्त '