ग़ज़ल
आज सभी कतार में नज़र आते हैं ,
अपनी हालत , बड़ी नाज़ुक बताते हैं।
हाहाकार मच गया है, काले धन में,
आम आदमी को, वे ही उकसाते हैं।
माना कि कुछ दिक्कतें हैं अब भी,
फिर भी लोग PM का हौसला बढ़ाते हैं।
काला बाजारियों ने, इस देश को लूटा ,
लालबुझक्कड़ लोग ही चिल्लाते हैं।
देश विकास का 90 %,10 % खा गए,
आज ईमादार होने का ढोंग रचाते हैं।
नॉट बंद करने का फ़ैसला सही है,
फुसफुसा कर सभी यही समझाते हैं।
नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया,
500 और 1000 के नॉट ,आँखें चुराते हैं।
***
-'कान्त '
आज सभी कतार में नज़र आते हैं ,
अपनी हालत , बड़ी नाज़ुक बताते हैं।
हाहाकार मच गया है, काले धन में,
आम आदमी को, वे ही उकसाते हैं।
माना कि कुछ दिक्कतें हैं अब भी,
फिर भी लोग PM का हौसला बढ़ाते हैं।
काला बाजारियों ने, इस देश को लूटा ,
लालबुझक्कड़ लोग ही चिल्लाते हैं।
देश विकास का 90 %,10 % खा गए,
आज ईमादार होने का ढोंग रचाते हैं।
नॉट बंद करने का फ़ैसला सही है,
फुसफुसा कर सभी यही समझाते हैं।
नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया,
500 और 1000 के नॉट ,आँखें चुराते हैं।
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-'कान्त '
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