सरकार !
चलो, एक नई सरकार बनाएँ ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
स्वप्नद्रष्टा -विकास पुरुष ये,
राष्ट्रप्रेम का है मतवाला।
जीता है सिर्फ देश के लिए ,
भले कोई कहे है ये चायवाला।
इनके पथ पर फूल बिछाएँ ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
संघर्ष से ये नहीं डरनेवाला,
डटकर मुकाबला करनेवाला।
मिले सफलता या मायूसी ,
है ये शोलों पर चलनेवाला।
चलो, कमल पर मुहर लगाएँ ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
पाँच साल में , बहुत किया ,
पल -पल देश के लिए जिया।
दुनिया को ताकत दिखलाई ,
शत्रु को आक्रमक संदेश दिया।
चलो,आज हम भी हाथ बटायें ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
चलो, एक नई सरकार बनाएँ ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
स्वप्नद्रष्टा -विकास पुरुष ये,
राष्ट्रप्रेम का है मतवाला।
जीता है सिर्फ देश के लिए ,
भले कोई कहे है ये चायवाला।
इनके पथ पर फूल बिछाएँ ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
संघर्ष से ये नहीं डरनेवाला,
डटकर मुकाबला करनेवाला।
मिले सफलता या मायूसी ,
है ये शोलों पर चलनेवाला।
चलो, कमल पर मुहर लगाएँ ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
पाँच साल में , बहुत किया ,
पल -पल देश के लिए जिया।
दुनिया को ताकत दिखलाई ,
शत्रु को आक्रमक संदेश दिया।
चलो,आज हम भी हाथ बटायें ,
मोदीजी को गद्दी पर बिठाएँ।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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