Thursday, 25 July 2019

गुरु जी  !

उज्व्वल   कर   दो   ज्ञान  से  भर  दो   मुझे  गरुजी !
बीच  भँवर में फँसी  नौका, बेडा  पार कर  दो गुरूजी !

रस-रूप-गुण   के  पारखी, सत्यकाम-विद्या  दाता ,
तुम्हीं  मेरे   राहबर -सारथी ,तुम्हीं  हो मेरे विधाता। 

अँधेरा  हटा   के ,चहुँ  ओर  उजाला   भर दो  गुरूजी,
बीच  भँवर  में  फँसी नौका,बेड़ा पार कर दो  गुरूजी। 

युग   युग   के  पुण्य  की   तुम,जीवनधारा   हमारी,
छवि    बसी   रहती   है  हृदय  में    हंमेशां  तुम्हारी। 

शंका -कुशंका -विषाद -अज्ञान    हर   लो    गुरूजी,
बीच भँवर में फँसी नौका,बेड़ा  पार   कर दो गुरूजी। 

तूफानों  से  लड़ लूंगी , सागर  को भी  ललकारूंगी,
यदि  तुमने   हाथ    थामा   तो पर्वत से टकरालूँगी। 

मेरी नस नस में  हिम्मत-हौंसला  भर  दो  गुरूजी,
बीच भँवर में फँसी नौका ,बेड़ा पार कर  दो गुरूजी। 
                               ***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '



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