Tuesday, 13 August 2019

तुझे !

बता,  किस    तरह  सजाऊं  तुझे ?
मेरे     मीठे   गीत   सुनाऊँ   तुझे ?

अकेला चला ,मंजिल   कठिन   है,
मेरा   साथ    देने,    बुलाऊँ  तुझे  ?

रंजिश  सही,  दिल दुखाने को आ,
मेरे गम से  क्या मैं मिलाऊँ तुझे  ?

यहां नाझ से,कदम अपने  रख दे, 
गम  से भरी  हो ,तो रुलाऊँ  तुझे ?

बज़म    में   तू  क्यों खामोश है ?
ग़ज़ल की तरह गुनगुनाऊँ तुझे  ?

शम्मा बुझी, कुछ दिखता  नहीं ,
अँधेरे   से क्या मैं ,बचाऊं  तुझे ?

किया प्यार हमने,बरसों  तलक ,
जामे ऐश    आज  पिलाऊँ  तुझे। 
                  ***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '




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