तुझे !
बता, किस तरह सजाऊं तुझे ?
मेरे मीठे गीत सुनाऊँ तुझे ?
अकेला चला ,मंजिल कठिन है,
मेरा साथ देने, बुलाऊँ तुझे ?
रंजिश सही, दिल दुखाने को आ,
मेरे गम से क्या मैं मिलाऊँ तुझे ?
यहां नाझ से,कदम अपने रख दे,
गम से भरी हो ,तो रुलाऊँ तुझे ?
बज़म में तू क्यों खामोश है ?
ग़ज़ल की तरह गुनगुनाऊँ तुझे ?
शम्मा बुझी, कुछ दिखता नहीं ,
अँधेरे से क्या मैं ,बचाऊं तुझे ?
किया प्यार हमने,बरसों तलक ,
जामे ऐश आज पिलाऊँ तुझे।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
बता, किस तरह सजाऊं तुझे ?
मेरे मीठे गीत सुनाऊँ तुझे ?
अकेला चला ,मंजिल कठिन है,
मेरा साथ देने, बुलाऊँ तुझे ?
रंजिश सही, दिल दुखाने को आ,
मेरे गम से क्या मैं मिलाऊँ तुझे ?
यहां नाझ से,कदम अपने रख दे,
गम से भरी हो ,तो रुलाऊँ तुझे ?
बज़म में तू क्यों खामोश है ?
ग़ज़ल की तरह गुनगुनाऊँ तुझे ?
शम्मा बुझी, कुछ दिखता नहीं ,
अँधेरे से क्या मैं ,बचाऊं तुझे ?
किया प्यार हमने,बरसों तलक ,
जामे ऐश आज पिलाऊँ तुझे।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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