देख रहा हूँ !
आजादी के स्वर्णिम अवसर पर ,
भारतमाता के चरण-चिन्ह रतनारे देख रहा हूँ !
कश्मीर की घाटियों में अमन -उजियारा छाया ,
पृथ्वी की इस जन्नत के सजे सितारे देख रहा हूँ !
प्रतिक्षण मौसम गीत ख़ुशी के गाये,
ऋतुओं का नया रूप ,हर किसीको भाये।
बिजली कौंधे,सावन बरसे रिमझिम ,
बीच बदरिया रंगीला मेघधनुष्य छाये
भूतान के नाचते -गाते मतवाले देख रहा हूँ !
0 पृथ्वी..
नदियों की जलधारा-दालसरोवर का रूप निराला,
कश्मीरियों का एक-दूजे को पिलाना प्रेम पियाला।
चोर पवन झनकार चुराकर देखो कैसा भागे,
बच्चे -बूढ़े-लिए तिरंगा चलते है सबसे आगे।
खड़े पैर इस धरती पर भारत के रखवाले देख रहा हूँ !
0 पृथ्वी ..
कश्मीर हमारा जान से प्यारा,बहे यहाँ प्रेम की धारा ,
बीत गए वो दिन ,जलती थी जब नफरत की ज्वाला।
नया काफिला ,नए रंग ,रहेंगे अब सब संग संग ,
छपन्न की छाती वाले ने 370 कर दी है भंग।
नरेंद्र की आंखोमे ,नया सूरज-नए चाँद-सितारे देख रहा हूँ !
0 पृथ्वी....
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
आजादी के स्वर्णिम अवसर पर ,
भारतमाता के चरण-चिन्ह रतनारे देख रहा हूँ !
कश्मीर की घाटियों में अमन -उजियारा छाया ,
पृथ्वी की इस जन्नत के सजे सितारे देख रहा हूँ !
प्रतिक्षण मौसम गीत ख़ुशी के गाये,
ऋतुओं का नया रूप ,हर किसीको भाये।
बिजली कौंधे,सावन बरसे रिमझिम ,
बीच बदरिया रंगीला मेघधनुष्य छाये
भूतान के नाचते -गाते मतवाले देख रहा हूँ !
0 पृथ्वी..
नदियों की जलधारा-दालसरोवर का रूप निराला,
कश्मीरियों का एक-दूजे को पिलाना प्रेम पियाला।
चोर पवन झनकार चुराकर देखो कैसा भागे,
बच्चे -बूढ़े-लिए तिरंगा चलते है सबसे आगे।
खड़े पैर इस धरती पर भारत के रखवाले देख रहा हूँ !
0 पृथ्वी ..
कश्मीर हमारा जान से प्यारा,बहे यहाँ प्रेम की धारा ,
बीत गए वो दिन ,जलती थी जब नफरत की ज्वाला।
नया काफिला ,नए रंग ,रहेंगे अब सब संग संग ,
छपन्न की छाती वाले ने 370 कर दी है भंग।
नरेंद्र की आंखोमे ,नया सूरज-नए चाँद-सितारे देख रहा हूँ !
0 पृथ्वी....
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-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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