Sunday, 4 September 2016

शिक्षक  हुँ  !

करता  हुँ  नवनिर्माण ,मैं  शिक्षक  हुँ ,
चेतना  का  परिमाण,  मैं  शिक्षक  हुँ । 

शिक्षा  ही   है   मेरी  जीवन  फुलवारी,
कठिन समय  में  हिम्मत  नहीँ  हारी ।  
बच्चे  ही  हैं  मेरे  प्राण, मैं  शिक्षक हुँ । 

राष्ट्र सम्मान  की  मैं  ही   हुँ  धरोहर,
मेरा   जीवन   मीठे जल   का  सरोवर। 
शब्द ही  हैं  मेरे  बाण, मैं   शिक्षक  हुँ । 

रूपये  नहीँ  हो शकते  मुझ पर  हावी,
मैं  तो  हुँ  मेरे  हिन्दुस्तान  का  भावि । 
तन-मन  सब  कुर्बान, मैं  शिक्षक  हुँ । 

द्रौण -कौटिल्य   का   मैं   हुँ    वारिस,
अध्यापन की  मैं  रिमझिम   बारिश । 
मूल्यों का  निगहबान, मैं  शिक्षक  हुँ । 

निदिध्यासन  में  मैं ,  ध्यान   लगाऊँ ,
मेरे   क्षात्रों   पर  मैं , बलि-बलि  जाऊँ । 
'कान्त ' का   अभिमान, मैं  शिक्षक हुँ । 
                        ***
-'कान्त '




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