शिक्षक हुँ !
करता हुँ नवनिर्माण ,मैं शिक्षक हुँ ,
चेतना का परिमाण, मैं शिक्षक हुँ ।
शिक्षा ही है मेरी जीवन फुलवारी,
कठिन समय में हिम्मत नहीँ हारी ।
बच्चे ही हैं मेरे प्राण, मैं शिक्षक हुँ ।
राष्ट्र सम्मान की मैं ही हुँ धरोहर,
मेरा जीवन मीठे जल का सरोवर।
शब्द ही हैं मेरे बाण, मैं शिक्षक हुँ ।
रूपये नहीँ हो शकते मुझ पर हावी,
मैं तो हुँ मेरे हिन्दुस्तान का भावि ।
तन-मन सब कुर्बान, मैं शिक्षक हुँ ।
द्रौण -कौटिल्य का मैं हुँ वारिस,
अध्यापन की मैं रिमझिम बारिश ।
मूल्यों का निगहबान, मैं शिक्षक हुँ ।
निदिध्यासन में मैं , ध्यान लगाऊँ ,
मेरे क्षात्रों पर मैं , बलि-बलि जाऊँ ।
'कान्त ' का अभिमान, मैं शिक्षक हुँ ।
***
-'कान्त '
करता हुँ नवनिर्माण ,मैं शिक्षक हुँ ,
चेतना का परिमाण, मैं शिक्षक हुँ ।
शिक्षा ही है मेरी जीवन फुलवारी,
कठिन समय में हिम्मत नहीँ हारी ।
बच्चे ही हैं मेरे प्राण, मैं शिक्षक हुँ ।
राष्ट्र सम्मान की मैं ही हुँ धरोहर,
मेरा जीवन मीठे जल का सरोवर।
शब्द ही हैं मेरे बाण, मैं शिक्षक हुँ ।
रूपये नहीँ हो शकते मुझ पर हावी,
मैं तो हुँ मेरे हिन्दुस्तान का भावि ।
तन-मन सब कुर्बान, मैं शिक्षक हुँ ।
द्रौण -कौटिल्य का मैं हुँ वारिस,
अध्यापन की मैं रिमझिम बारिश ।
मूल्यों का निगहबान, मैं शिक्षक हुँ ।
निदिध्यासन में मैं , ध्यान लगाऊँ ,
मेरे क्षात्रों पर मैं , बलि-बलि जाऊँ ।
'कान्त ' का अभिमान, मैं शिक्षक हुँ ।
***
-'कान्त '
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