बाबाओंका देश है !
ये बाबाओंका देश है , सुन लो मेरे भाई !
आशाराम हो या और कोई ,सबकी एक सिलाई।
हर शख्श समझता है अपने को भूला भटका,
इसलिए पाखंडियों का , कारोबार नहीं अटका।
भगवान से बड़े हो गए ये, कथा हमें सुनाई,
आशाराम हो या और कोई, सबकी एक सिलाई।
तुम पापी हो ,पाप धोने , इनकी शरण में जाना,
बड़े गौर से सुनता है, वक्ताकी ये बातें जमाना।
आज तक किस बाबाने ,किसको सच्ची राह बताई ?
आशाराम हो या और कोई, सबकी एक सिलाई।
माँ -बापको वृद्धाश्रम भेजकर ,लोग इनके पाँव दबाते,
ये नीति रीति ये धर्म, मुझको समझ नहीं आते।
याद करो गीता को, कृष्ण ने कर्म की बात सुनाई,
आशाराम हो या और कोई, सबकी एक सिलाई।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
ये बाबाओंका देश है , सुन लो मेरे भाई !
आशाराम हो या और कोई ,सबकी एक सिलाई।
हर शख्श समझता है अपने को भूला भटका,
इसलिए पाखंडियों का , कारोबार नहीं अटका।
भगवान से बड़े हो गए ये, कथा हमें सुनाई,
आशाराम हो या और कोई, सबकी एक सिलाई।
तुम पापी हो ,पाप धोने , इनकी शरण में जाना,
बड़े गौर से सुनता है, वक्ताकी ये बातें जमाना।
आज तक किस बाबाने ,किसको सच्ची राह बताई ?
आशाराम हो या और कोई, सबकी एक सिलाई।
माँ -बापको वृद्धाश्रम भेजकर ,लोग इनके पाँव दबाते,
ये नीति रीति ये धर्म, मुझको समझ नहीं आते।
याद करो गीता को, कृष्ण ने कर्म की बात सुनाई,
आशाराम हो या और कोई, सबकी एक सिलाई।
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-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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