Wednesday, 20 June 2018

योग !

नई    उर्ज़ा    नए   प्राण , संचित   करता   है  योग,
अनुचित  बहती  साँसों  को उचित करता  है  योग !

कपालभारती  ,अनुलोम विलोम ,हो कोई  भी मुद्रा ,
शरीर  में  बसे  रोगों को  विचलित  करता  है योग !

मुँह -अँधरे ,मुँह -उजाले ,जीवनदाता वायु बहता है,
आसन  जमा  के बैठो, कुछ सूचित  करता है योग !

ऋषिओं की  दी ये  धरोहर ,बड़ी  अनमोल है  भैया,
पूर्वापर -पूर्वोक्त  बातों  को,प्रचलित करता है योग !

आ जाओ  संकल्प करें , सब भारतवासी  मिलकर,
'कान्त 'के  तन-मन  को, आमंत्रित  करता है योग !
                              ***
-कृष्णकांत भाटिया  'कान्त '

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