पतंग !
आसमान में छाये पतंग !
सबके मन को भायें पतंग !
लंबी दोर पे होके सवार,
देखो कैसे लहरायें पतंग !
रंगरंगीले छेलछबीले नटखट,
सखियों संग शरमायें पतंग !
उड़ें कटें डुबकी लगायें ये तो,
नीचे आकर छटपटायें पतंग !
पड़े रहें बाज़ार में तो बात नहीं,
उड़ान भरी तो कट जायें पतंग !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
आसमान में छाये पतंग !
सबके मन को भायें पतंग !
लंबी दोर पे होके सवार,
देखो कैसे लहरायें पतंग !
रंगरंगीले छेलछबीले नटखट,
सखियों संग शरमायें पतंग !
उड़ें कटें डुबकी लगायें ये तो,
नीचे आकर छटपटायें पतंग !
पड़े रहें बाज़ार में तो बात नहीं,
उड़ान भरी तो कट जायें पतंग !
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-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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