Saturday, 13 January 2018

पतंग  !

आसमान    में     छाये   पतंग  !
सबके   मन  को    भायें  पतंग ! 

लंबी    दोर    पे    होके   सवार,
देखो    कैसे    लहरायें   पतंग !

रंगरंगीले  छेलछबीले  नटखट, 
सखियों  संग  शरमायें   पतंग !

उड़ें  कटें  डुबकी  लगायें  ये तो,
नीचे   आकर छटपटायें  पतंग !

पड़े रहें बाज़ार में तो  बात नहीं,
उड़ान भरी तो  कट जायें पतंग !
                  ***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '








No comments:

Post a Comment