Saturday, 24 March 2018

श्री राम  वंदना  !

श्री   राम  ले   अवतार   भारतवर्ष   में    फिर   आइए ,
राजीव  लोचन    चाप    की    टंकार   घोर    सुनाइए।  

महि  पे   अघों   का  भार   बढ़ता   जा   रहा  रोज  ही, 
प्रत्यक्ष   दीनानाथ    निज    नाम    कर   दिखलाइए । 

साहस   हमें   सुग्रीव  सा  बल  पवनसुत सा प्राप्त हो,
दशरथ-सुवन ,कापुरुषता  मन  मलीनता हर लीजिए। 

जीवन    हमारा  धर्ममय  हो,  सुमति  के  भंडार   हों ,
जावें  कुपथ  पर पग नहीं ,हिय  नेत्र  पावन  कीजिए। 

यम-दम -नियम   पालें  सदा,  धारि   दया  गंभीरता,
संतोष -शील -स्नेह -ममता   और   क्षमता   दीजिए । 

वासर -निशा    बीतें   तुम्हारे  ध्यान  व्  गुणगान में,
लख   दूसरों   का   द्रव्य   है, जेहन  में प्रभु   उतारिए। 

कीजे   कृपा   करुणेश   हम  सब मिल उतारें  आरती,
'कान्त ' हृदय की  भावना ,स्वीकार  अब कर लीजिए। 
                               ***
-कृष्णकांत  भाटिया  'कान्त '

                                 


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