श्री राम वंदना !
श्री राम ले अवतार भारतवर्ष में फिर आइए ,
राजीव लोचन चाप की टंकार घोर सुनाइए।
महि पे अघों का भार बढ़ता जा रहा रोज ही,
प्रत्यक्ष दीनानाथ निज नाम कर दिखलाइए ।
साहस हमें सुग्रीव सा बल पवनसुत सा प्राप्त हो,
दशरथ-सुवन ,कापुरुषता मन मलीनता हर लीजिए।
जीवन हमारा धर्ममय हो, सुमति के भंडार हों ,
जावें कुपथ पर पग नहीं ,हिय नेत्र पावन कीजिए।
यम-दम -नियम पालें सदा, धारि दया गंभीरता,
संतोष -शील -स्नेह -ममता और क्षमता दीजिए ।
वासर -निशा बीतें तुम्हारे ध्यान व् गुणगान में,
लख दूसरों का द्रव्य है, जेहन में प्रभु उतारिए।
कीजे कृपा करुणेश हम सब मिल उतारें आरती,
'कान्त ' हृदय की भावना ,स्वीकार अब कर लीजिए।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
श्री राम ले अवतार भारतवर्ष में फिर आइए ,
राजीव लोचन चाप की टंकार घोर सुनाइए।
महि पे अघों का भार बढ़ता जा रहा रोज ही,
प्रत्यक्ष दीनानाथ निज नाम कर दिखलाइए ।
साहस हमें सुग्रीव सा बल पवनसुत सा प्राप्त हो,
दशरथ-सुवन ,कापुरुषता मन मलीनता हर लीजिए।
जीवन हमारा धर्ममय हो, सुमति के भंडार हों ,
जावें कुपथ पर पग नहीं ,हिय नेत्र पावन कीजिए।
यम-दम -नियम पालें सदा, धारि दया गंभीरता,
संतोष -शील -स्नेह -ममता और क्षमता दीजिए ।
वासर -निशा बीतें तुम्हारे ध्यान व् गुणगान में,
लख दूसरों का द्रव्य है, जेहन में प्रभु उतारिए।
कीजे कृपा करुणेश हम सब मिल उतारें आरती,
'कान्त ' हृदय की भावना ,स्वीकार अब कर लीजिए।
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-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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