होली है !
बरसाना में धूम मची है, होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
मतवाली दुनिया के ,हम सब हैं मस्त दीवाने,
रंगों की बौछारों में ,भीग के जीने वाले परवाने !
हृदय को ये बात जँची है, होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
फगुहारों का बावलापन छलकता पिचकारी में,
हुड़दंग मच जाता है उनकी दावेदारी में ,
गोरी भीगने से कहाँ बची है ,होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
फागुन का मौसम , जामे -जम,जामे -जमशेद,
लालायित है आज जवानी, मिट गए सब भेद !
मस्ती की ये आँच पची है,होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
बरसाना में धूम मची है, होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
मतवाली दुनिया के ,हम सब हैं मस्त दीवाने,
रंगों की बौछारों में ,भीग के जीने वाले परवाने !
हृदय को ये बात जँची है, होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
फगुहारों का बावलापन छलकता पिचकारी में,
हुड़दंग मच जाता है उनकी दावेदारी में ,
गोरी भीगने से कहाँ बची है ,होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
फागुन का मौसम , जामे -जम,जामे -जमशेद,
लालायित है आज जवानी, मिट गए सब भेद !
मस्ती की ये आँच पची है,होली है भाई होली !
हमने भी टोली रची है, होली है भाई होली !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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