गीत
दिन बीत चूका है भैया,
कुछ संभल शको तो संभलो रे,
तेरी नगरी में कोई आयेगा,
कुछ जगह करो तो करलो रे !
पदचाप किसी की आयेगी ,
कान इसी और धर लो रे !
मीत तुम्हारे हैं लाखों पर ,
कुछ फूल चुनो तो चुनलो रे !
तुम्हें बुलातीं दिया और बाती ,
इनके साथ चलो तो चल रो ले !
-'फलक'
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