गीत
फूल खिले हैं मेरे चमन में,
मेरे प्रियतम अब तो आजा !
उमड़-घुमड़कर तू बरसा जा !
प्यार के रंग मेरे,धरोहर हैं पास तेरे,
अपना ही सपना मेरी आँखें हेरे !
मेहमान बनकर मुझ में समा जा !
०मेरे प्रियतम ....
जब तक रहेंगे तेरी आहट के साये,
फिर क्यों न मुझे खुद ख़ुदा ही बुलाये !
नहीं जाऊँगी,अब तू एक झलक दिखला जा !
०मेरे प्रियतम....
कब की खड़ी हुँ ,चिंता मत करना,
आकर के तू , सारे सपने धरना !
मेरी साँसो में प्राण बनकर तू इठला जा !
० मेरे प्रियतम ……
मत पूछना मेरी बातों पर हैं पहरे,
मैंने भी देखे हैं ख़्वाब सुनहरे !
अँबराव में मयुर नर्तन कर इतरा जा !
० मेरे प्रियतम ……
***
-'कान्त'
फूल खिले हैं मेरे चमन में,
मेरे प्रियतम अब तो आजा !
उमड़-घुमड़कर तू बरसा जा !
प्यार के रंग मेरे,धरोहर हैं पास तेरे,
अपना ही सपना मेरी आँखें हेरे !
मेहमान बनकर मुझ में समा जा !
०मेरे प्रियतम ....
जब तक रहेंगे तेरी आहट के साये,
फिर क्यों न मुझे खुद ख़ुदा ही बुलाये !
नहीं जाऊँगी,अब तू एक झलक दिखला जा !
०मेरे प्रियतम....
कब की खड़ी हुँ ,चिंता मत करना,
आकर के तू , सारे सपने धरना !
मेरी साँसो में प्राण बनकर तू इठला जा !
० मेरे प्रियतम ……
मत पूछना मेरी बातों पर हैं पहरे,
मैंने भी देखे हैं ख़्वाब सुनहरे !
अँबराव में मयुर नर्तन कर इतरा जा !
० मेरे प्रियतम ……
***
-'कान्त'
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