ग़ज़ल
खुद ही हँसता हूँ ,खुद ही रो लेता हूँ ,
वक़ूफ़ अपने मन को ,हरदम देता हूँ !
मुझ से मत पूछो, हड़कंप के बारे में ,
भीतर ही भीतर ,मैं सब कुछ सहता हूँ !
प्यार किया है मैंने, खेल नहीँ खेला ,
तेरी चाहत में मैं , पल पल मरता हूँ !
झींगुर से पूछो, प्यास कैसे बुझाते हैं ,
नदी में डूबकर ;समंदर में निकलता हूँ !
कोहसार में बनाया मैंने अपना बसेरा,
कोहराम नहीँ ,गिरकर भी सँभलता हूँ !
***
-'कान्त '
*वक़ूफ़ -સમજ *हड़कंप-ખળભળાટ
*झींगुर -તમરું *कोहसार-પહાડ
*कोहराम -રોકકડ
खुद ही हँसता हूँ ,खुद ही रो लेता हूँ ,
वक़ूफ़ अपने मन को ,हरदम देता हूँ !
मुझ से मत पूछो, हड़कंप के बारे में ,
भीतर ही भीतर ,मैं सब कुछ सहता हूँ !
प्यार किया है मैंने, खेल नहीँ खेला ,
तेरी चाहत में मैं , पल पल मरता हूँ !
झींगुर से पूछो, प्यास कैसे बुझाते हैं ,
नदी में डूबकर ;समंदर में निकलता हूँ !
कोहसार में बनाया मैंने अपना बसेरा,
कोहराम नहीँ ,गिरकर भी सँभलता हूँ !
***
-'कान्त '
*वक़ूफ़ -સમજ *हड़कंप-ખળભળાટ
*झींगुर -તમરું *कोहसार-પહાડ
*कोहराम -રોકકડ
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