Thursday, 3 November 2016

आईना 

पत्थरों  का  नगर  है ; बचा  आईना ,
कर  रहा  है  यही  इल्तिजा  आईना  !

देख कर  लोग  तुझको  सँवरने लगे,
अपने क़िरदार को  तू  बना  आईना  !

घर के आईने  की  क़द्र  घट जाएगी ,
लाया  बाज़ार  से गर  नया  आईना !

भेद चेहरे   के   खुल जायेंगे  देखना,
सामने  जब   तेरे   आयेगा  आईना  !

लाख  चेहरे  को अपने छुपाये  मगर,
जानता  है   तेरी  हर  अदा   आईना  !

हर  तरफ  बे-ज़मीरों का  बाज़ार  है,
तू  किसीको  वहाँ  न दिखा  आईना  !

आईना  तुझसे  कहता है ये  झाजिये ,
पहेले खुद देख,ले फिर दिखा आईना !
                          ***
-अहेज़ाज़  कँवर 

1 comment:

  1. Heart touching lines or waqyi bhut gahrayi h gajal me kawar sahab kya likha h thanks for lovely.....

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