आईना
पत्थरों का नगर है ; बचा आईना ,
कर रहा है यही इल्तिजा आईना !
देख कर लोग तुझको सँवरने लगे,
अपने क़िरदार को तू बना आईना !
घर के आईने की क़द्र घट जाएगी ,
लाया बाज़ार से गर नया आईना !
भेद चेहरे के खुल जायेंगे देखना,
सामने जब तेरे आयेगा आईना !
लाख चेहरे को अपने छुपाये मगर,
जानता है तेरी हर अदा आईना !
हर तरफ बे-ज़मीरों का बाज़ार है,
तू किसीको वहाँ न दिखा आईना !
आईना तुझसे कहता है ये झाजिये ,
पहेले खुद देख,ले फिर दिखा आईना !
***
-अहेज़ाज़ कँवर
पत्थरों का नगर है ; बचा आईना ,
कर रहा है यही इल्तिजा आईना !
देख कर लोग तुझको सँवरने लगे,
अपने क़िरदार को तू बना आईना !
घर के आईने की क़द्र घट जाएगी ,
लाया बाज़ार से गर नया आईना !
भेद चेहरे के खुल जायेंगे देखना,
सामने जब तेरे आयेगा आईना !
लाख चेहरे को अपने छुपाये मगर,
जानता है तेरी हर अदा आईना !
हर तरफ बे-ज़मीरों का बाज़ार है,
तू किसीको वहाँ न दिखा आईना !
आईना तुझसे कहता है ये झाजिये ,
पहेले खुद देख,ले फिर दिखा आईना !
***
-अहेज़ाज़ कँवर
Heart touching lines or waqyi bhut gahrayi h gajal me kawar sahab kya likha h thanks for lovely.....
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