गीत
प्रभु ! जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
आशाओंके दीप जलाये,उसको अंगीकार करो !
नई दिशाएँ ,नई नवेली लहरें आज़ डोल रहीं,
मेरे अडग संकल्पोंको तराजू में वे तोल रहीं।
अँधेरे में डगमग चलते पैरों को आधार करो !
प्रभु ! जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
एक बार फिर नया सवेरा मेरे जीवन में आया,
ढेर सारी खुशियों को वह अपने संग लाया।
मेरी आँगन- बगिया में शबनम की बौछार करो !
प्रभु ! जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
टिम -टिम करते तारे , सुहाते नील गगन में ,
प्रकाश -पुंज छिपा है , मेरी भीतरी अगन में।
भटक न जाऊँ मैं डगर में, प्रज्ञा का प्रहार करो !
प्रभु, जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
***
-'कान्त'
प्रभु ! जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
आशाओंके दीप जलाये,उसको अंगीकार करो !
नई दिशाएँ ,नई नवेली लहरें आज़ डोल रहीं,
मेरे अडग संकल्पोंको तराजू में वे तोल रहीं।
अँधेरे में डगमग चलते पैरों को आधार करो !
प्रभु ! जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
एक बार फिर नया सवेरा मेरे जीवन में आया,
ढेर सारी खुशियों को वह अपने संग लाया।
मेरी आँगन- बगिया में शबनम की बौछार करो !
प्रभु ! जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
टिम -टिम करते तारे , सुहाते नील गगन में ,
प्रकाश -पुंज छिपा है , मेरी भीतरी अगन में।
भटक न जाऊँ मैं डगर में, प्रज्ञा का प्रहार करो !
प्रभु, जैसा हुँ वैसा ही मुझको स्वीकार करो !
***
-'कान्त'
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