लोग
गिद्धों से भी बदतर हैं ये लोग,
जो जिंदा इन्सानों को ....
नोच नोच कर खाते हैं।
मंदिर में देवी की प्रतिमा को
कपड़े पहनाकर ..
बीच सड़क पर किसी अबला को
नंगी कर ;अपनी मर्दानगी दिखाते हैं।
मंदिर -मस्जिद में ईश्वर -अल्लाह
के सामने इनका स्वरूप सुहाना लगता है,
जैसे ही बाहर निकले ,भीतर का जानवर
बेबस -लाचारों को निगलता है।
बे-शर्मी से ये अपनी औकात पर आ जाते हैं ,
जिंदा इन्सानों को ये नोच नोच कर खाते हैं।
इनका ईमान चौराहे पर टके शेर बिकता है,
सज्जनता का मुख़ौटा पहनकर ,
बन -ठन कर ये बाज़ार में निकलता है।
रोशनी के लिए ये दूसरों के घर जलाते हैं ,
जिंदा इन्सानों को ये नोच नोच कर खाते हैं।
औरत को माँ-बहन-भाभी का दर्जा देनेवाले,
जहाँ नारी की पूजा होती है ,वहाँ देवता रहते हैं ,
ऐसा कहनेवाले .......
उसी औरत को कोठों पर नचाते हैं ,
जिन्दा इन्सानों को ये नोच नोच कर खाते हैं।
***
-'कान्त '
गिद्धों से भी बदतर हैं ये लोग,
जो जिंदा इन्सानों को ....
नोच नोच कर खाते हैं।
मंदिर में देवी की प्रतिमा को
कपड़े पहनाकर ..
बीच सड़क पर किसी अबला को
नंगी कर ;अपनी मर्दानगी दिखाते हैं।
मंदिर -मस्जिद में ईश्वर -अल्लाह
के सामने इनका स्वरूप सुहाना लगता है,
जैसे ही बाहर निकले ,भीतर का जानवर
बेबस -लाचारों को निगलता है।
बे-शर्मी से ये अपनी औकात पर आ जाते हैं ,
जिंदा इन्सानों को ये नोच नोच कर खाते हैं।
इनका ईमान चौराहे पर टके शेर बिकता है,
सज्जनता का मुख़ौटा पहनकर ,
बन -ठन कर ये बाज़ार में निकलता है।
रोशनी के लिए ये दूसरों के घर जलाते हैं ,
जिंदा इन्सानों को ये नोच नोच कर खाते हैं।
औरत को माँ-बहन-भाभी का दर्जा देनेवाले,
जहाँ नारी की पूजा होती है ,वहाँ देवता रहते हैं ,
ऐसा कहनेवाले .......
उसी औरत को कोठों पर नचाते हैं ,
जिन्दा इन्सानों को ये नोच नोच कर खाते हैं।
***
-'कान्त '
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