ग़ज़ल
आईने में देख, तेरा चेहरा कैसा है ?
चाँद के इर्द-गिर्द, ये पहेरा कैसा है ?
असमंजस है घोड़े पर बैठा दूल्हा,
आँखों के आगे , ये सहेरा कैसा है ?
सुन रहे हैं चाहनेवाले, ये अफ़साने,
अंजुमन के बीच, ये बहिरा कैसा है ?
तगाफूल थी ,कि रंग बिखर जायेंगे,
सबा का रुख आज, गहिरा कैसा है ?
तुम तो वादा करके दूर चले गए,
'कान्त' के दिलमें, ये डेरा कैसा है ?
***
-'कान्त'
आईने में देख, तेरा चेहरा कैसा है ?
चाँद के इर्द-गिर्द, ये पहेरा कैसा है ?
असमंजस है घोड़े पर बैठा दूल्हा,
आँखों के आगे , ये सहेरा कैसा है ?
सुन रहे हैं चाहनेवाले, ये अफ़साने,
अंजुमन के बीच, ये बहिरा कैसा है ?
तगाफूल थी ,कि रंग बिखर जायेंगे,
सबा का रुख आज, गहिरा कैसा है ?
तुम तो वादा करके दूर चले गए,
'कान्त' के दिलमें, ये डेरा कैसा है ?
***
-'कान्त'
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