Saturday, 4 February 2017

ग़ज़ल 

आईने  में  देख, तेरा  चेहरा  कैसा  है  ?
चाँद  के  इर्द-गिर्द, ये  पहेरा  कैसा है ?

असमंजस  है  घोड़े  पर  बैठा  दूल्हा,
आँखों  के  आगे , ये  सहेरा  कैसा है ?

सुन  रहे हैं  चाहनेवाले, ये अफ़साने,
अंजुमन के बीच, ये बहिरा  कैसा है ?

तगाफूल थी ,कि रंग बिखर जायेंगे,
सबा  का रुख आज, गहिरा कैसा है ?

तुम  तो   वादा करके   दूर चले गए,
'कान्त' के  दिलमें, ये डेरा  कैसा है ?
                      ***
-'कान्त'

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