ग़ज़ल
दर्द भरा; ये ज़माना है,
खाली ; मेरा पैमाना है.
दारु पीने का शोख नहीं,
बस ;गमों को भगाना है.
बंदिशें ;ग़ज़ल की घायल,
काफ़िये को बचाना है.
शायर की किस्मत पाई,
न घर है; न ठिकाना है.
तड़पती है बुलबुल प्यारी,
पिंज़रा ;ही क़ैदख़ाना है.
क्या पाया ? इस जहां से,
जीस्त ने फैंका दाना है.
अश्क़ ने, धो डाले चर्चे,
किस्सा बड़ा पुराना है.
***
-'कान्त'
दर्द भरा; ये ज़माना है,
खाली ; मेरा पैमाना है.
दारु पीने का शोख नहीं,
बस ;गमों को भगाना है.
बंदिशें ;ग़ज़ल की घायल,
काफ़िये को बचाना है.
शायर की किस्मत पाई,
न घर है; न ठिकाना है.
तड़पती है बुलबुल प्यारी,
पिंज़रा ;ही क़ैदख़ाना है.
क्या पाया ? इस जहां से,
जीस्त ने फैंका दाना है.
अश्क़ ने, धो डाले चर्चे,
किस्सा बड़ा पुराना है.
***
-'कान्त'
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