नई सुबह होगी !
अँधेरा छँटेगा और , नई सुबह होगी,
प्यार आपस में बँटेगा नई सुबह होगी।
रात घनी कितनी , लंबी क्यों न हो ,
उजाला निकलता ही है, सारे जहाँ में.
तू खुद से नहीं कटेगा, नई सुबह होगी।
प्यार आपस में बँटेगा ,नई सुबह होगी।
वक़्त -ख़ुशी गम के साथ चलता है ,
कभी जीवन तो कभी मृत्यु निगलता है।
तू पीछे नहीं हटेगा, नई सुबह होगी,
प्यार आपस में बँटेगा ,नई सुबह होगी।
ये दिन जो मुसीबतों को ले आये हैं,
फिर भी हमने गीत ,ख़ुशी के गाये हैं।
श्री हरि नाम रटेगा ,नई सुबह होगी,
प्यार आपस में बँटेगा ,नई सुबह होगी।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
अँधेरा छँटेगा और , नई सुबह होगी,
प्यार आपस में बँटेगा नई सुबह होगी।
रात घनी कितनी , लंबी क्यों न हो ,
उजाला निकलता ही है, सारे जहाँ में.
तू खुद से नहीं कटेगा, नई सुबह होगी।
प्यार आपस में बँटेगा ,नई सुबह होगी।
वक़्त -ख़ुशी गम के साथ चलता है ,
कभी जीवन तो कभी मृत्यु निगलता है।
तू पीछे नहीं हटेगा, नई सुबह होगी,
प्यार आपस में बँटेगा ,नई सुबह होगी।
ये दिन जो मुसीबतों को ले आये हैं,
फिर भी हमने गीत ,ख़ुशी के गाये हैं।
श्री हरि नाम रटेगा ,नई सुबह होगी,
प्यार आपस में बँटेगा ,नई सुबह होगी।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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