दिवाली है !
अंधकार को दूर भगायें
---------आज दिवाली है !
घर आँगन में दीप जलायें,
---------आज दिवाली है !
कैसे रात छिपी है ये काली,
विनय ज्योत को धरकर।
तमस की घेरी छायाओंको ,
अपने भीतर -तल भरकर।
बाधाएं हैं चलो उन्हें छुड़ायें,
-----------आज दिवाली है !
भरा हुआ है अभी हृदय मेरा,
तुम जो चाहो हो जाऊँ तेरा !
बाहर मेरा संताप हरो तुम,
इसी तरह मन में करो बसेरा !
शत शत्रुओँको चलो हरायें ,
------------आज दिवाली है !
आज खोलो हृदय दल खोलो,
ये मेरा,ये तेरा है दिल से भूलो !
निज सौरभ को लहराकर तुम,
रस से भरे भरे मीठे बोल बोलो !
सहस छेदकर बांसुरी बजाएँ ,
-------------आज दिवाली है !
---------------------------------
-'कान्त'
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अंधकार को दूर भगायें
---------आज दिवाली है !
घर आँगन में दीप जलायें,
---------आज दिवाली है !
कैसे रात छिपी है ये काली,
विनय ज्योत को धरकर।
तमस की घेरी छायाओंको ,
अपने भीतर -तल भरकर।
बाधाएं हैं चलो उन्हें छुड़ायें,
-----------आज दिवाली है !
भरा हुआ है अभी हृदय मेरा,
तुम जो चाहो हो जाऊँ तेरा !
बाहर मेरा संताप हरो तुम,
इसी तरह मन में करो बसेरा !
शत शत्रुओँको चलो हरायें ,
------------आज दिवाली है !
आज खोलो हृदय दल खोलो,
ये मेरा,ये तेरा है दिल से भूलो !
निज सौरभ को लहराकर तुम,
रस से भरे भरे मीठे बोल बोलो !
सहस छेदकर बांसुरी बजाएँ ,
-------------आज दिवाली है !
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-'कान्त'
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