मूरत
प्रभु अति सुंदर मूरत तेरी,
अब आँखें तृप्त हुईं हैं मेरी !
नयन कमल से होठ रसीले ,
बंसी से निकलें सुर सुरीले !
हास्य मधुर-गमन मनोहर,
हृदय तेरा - प्रशांत सरोवर !
प्रभु अनुपम है रूप तुम्हारा,
अब साँसें लुप्त हुईं हैं मेरी !
गालपे खंजन तू दुःखभंजन,
नयनोंमे आँजे है तू अंजन !
पतली कमरिया रास रचैया ,
पाँव में बाजे मधुर पैंजनिया !
तन पर सोहे पीला पीतांबर,
मोर पिच्छ का रंग नीलांबर !
प्रभु काले घने गेसु तुम्हारे,
अब आँखें तृप्त हुई हैं मेरी !
***
-'कान्त '
प्रभु अति सुंदर मूरत तेरी,
अब आँखें तृप्त हुईं हैं मेरी !
नयन कमल से होठ रसीले ,
बंसी से निकलें सुर सुरीले !
हास्य मधुर-गमन मनोहर,
हृदय तेरा - प्रशांत सरोवर !
प्रभु अनुपम है रूप तुम्हारा,
अब साँसें लुप्त हुईं हैं मेरी !
गालपे खंजन तू दुःखभंजन,
नयनोंमे आँजे है तू अंजन !
पतली कमरिया रास रचैया ,
पाँव में बाजे मधुर पैंजनिया !
तन पर सोहे पीला पीतांबर,
मोर पिच्छ का रंग नीलांबर !
प्रभु काले घने गेसु तुम्हारे,
अब आँखें तृप्त हुई हैं मेरी !
***
-'कान्त '
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