----------नई सुबह -----------
आज हुई है नई सुबह ,
आज बना है नया तराना !
अब अच्छे दिन आयेंगे मोदी,
जन पद को तुम भूल न जाना !
उमंग भरा है इन आँखोंमें ,
सपने भी हैं कई सँजोये !
दो वक़्त की रोटी मिल जाये ,
ऐसा कुछ कर के दिखलाना !
विकास की ये तेरी कल्पना,
बँटकर रह न जाये अमीरोंमें !
भले झगमगायेँ उनकी कोठियाँ ,
झोंपड़े में भी तुम दिया जलाना !
अब हम सब मिलकर साथ चलेंगे,
नरेंद्र, दुनियाँ से फिर कयों डरेंगे?
'फलक' झुक रहा है तेरे आगे ,
अपने वादों को मत झुठलाना !
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-कृष्णकांत भाटिया 'फलक'
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आज हुई है नई सुबह ,
आज बना है नया तराना !
अब अच्छे दिन आयेंगे मोदी,
जन पद को तुम भूल न जाना !
उमंग भरा है इन आँखोंमें ,
सपने भी हैं कई सँजोये !
दो वक़्त की रोटी मिल जाये ,
ऐसा कुछ कर के दिखलाना !
विकास की ये तेरी कल्पना,
बँटकर रह न जाये अमीरोंमें !
भले झगमगायेँ उनकी कोठियाँ ,
झोंपड़े में भी तुम दिया जलाना !
अब हम सब मिलकर साथ चलेंगे,
नरेंद्र, दुनियाँ से फिर कयों डरेंगे?
'फलक' झुक रहा है तेरे आगे ,
अपने वादों को मत झुठलाना !
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-कृष्णकांत भाटिया 'फलक'
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