Sunday, 25 May 2014

----------नई सुबह -----------

आज  हुई  है  नई  सुबह ,
आज  बना है  नया तराना !

अब अच्छे दिन आयेंगे मोदी,
जन पद को तुम भूल न जाना !

उमंग भरा है  इन  आँखोंमें ,
सपने  भी  हैं  कई  सँजोये  !

दो  वक़्त  की  रोटी मिल जाये ,
ऐसा  कुछ  कर के  दिखलाना !

विकास की  ये तेरी  कल्पना,
बँटकर  रह न  जाये  अमीरोंमें !

भले झगमगायेँ उनकी कोठियाँ ,
झोंपड़े  में भी  तुम  दिया जलाना !

अब  हम सब मिलकर साथ चलेंगे,
नरेंद्र, दुनियाँ से फिर कयों  डरेंगे?

'फलक' झुक  रहा  है तेरे  आगे ,
अपने  वादों  को  मत  झुठलाना !
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-कृष्णकांत भाटिया 'फलक'
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