Wednesday, 6 January 2016

ग़ज़ल 

कोई  सो कर सबकुछ  खोता है,
कोई जागकर सबकुछ पाता है !

अपनी किस्मत अपने हाथोंमे ,
ज़िंदगी है तो  तूफ़ान  आता है. !

गर्दिश  में  रहते हैं सितारे  भी,
चाँद  उनको  भी खा  जाता  है !

सरे बाज़ार किसी से मत रूठो,
इश्क़ -क्रंदन  ही साथ लाता है !

सारे जहाँ में जिसकी मौजूदगी,
वो  ही   तो  सब का   दाता   है !

दरिया-ए -हुश्न पर  पर्दा  क्यूँ  ?
रब  हाथों से जिसे तराशता है !
                 ***
-'कान्त '



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