Saturday, 15 August 2015

माँ तसलीमात  !

माँ  तसलीमात !
तू भरी है मीठे पानी से ,
फल फूलों की शादाबी से। 
दक्किन की ठंडी हवाओं से,
फ़सलों की सुहानी फ़िज़ाओं से। 
तसलीमात माँ तसलीमात !
तेरी रातें रोशन चाँद से,
तेरी रोनक सब्ज़े -फाम से। 
तेरी प्यार भरी मुस्कान है,
तेरी मीठी बहुत जबान है। 
तेरी बाँहों में मेरी राहत है,
तेरे कदमों मेरी ज़न्नत है। 
तसलीमात माँ तसलीमात !
             ***
-आरीफ महम्मदखान 

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