Monday, 28 December 2015

सलाम  2016 !

2016   तेरी   बालि    सुबह   को     सलाम  !
अय   साल  तेरी  पहली  नज़र  को सलाम  !

उमड़ना  यूँ  तेरा , मचलना  युँ  तेरा  सवेरे,
बन -ठन के बाहर, निकलना युँ  तेरा सवेरे. 

गूँजते  मधुबन में , उन  भ्रमर  को  सलाम !
खिल  रहे  पानी  में  उन कँवल  को सलाम !

कजरारे   नैना  तेरे  तिरछी  नज़र से  देखें  ,
क़ज़ा  जो  आ जाए ,बिगड़ी   नज़र से देखें .

ढूँढती  अरमानों  को उस डगर  को  सलाम  ,
तुझको समेटे सपनों में ,ज़िगर को सलाम !

चटपटी  हमारे दिल में  तुझसे  मिलने  की,
चटापटी  तुझे  भी होगी  हमसे  मिलने की . 

'कान्त' हो   घायल  उस  प्रहर  को  सलाम !
अय  साल  तेरी   बालि   सुबह  को  सलाम !
                           ***
-'कान्त'












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