सलाम 2016 !
2016 तेरी बालि सुबह को सलाम !
अय साल तेरी पहली नज़र को सलाम !
उमड़ना यूँ तेरा , मचलना युँ तेरा सवेरे,
बन -ठन के बाहर, निकलना युँ तेरा सवेरे.
गूँजते मधुबन में , उन भ्रमर को सलाम !
खिल रहे पानी में उन कँवल को सलाम !
कजरारे नैना तेरे तिरछी नज़र से देखें ,
क़ज़ा जो आ जाए ,बिगड़ी नज़र से देखें .
ढूँढती अरमानों को उस डगर को सलाम ,
तुझको समेटे सपनों में ,ज़िगर को सलाम !
चटपटी हमारे दिल में तुझसे मिलने की,
चटापटी तुझे भी होगी हमसे मिलने की .
'कान्त' हो घायल उस प्रहर को सलाम !
अय साल तेरी बालि सुबह को सलाम !
***
-'कान्त'
2016 तेरी बालि सुबह को सलाम !
अय साल तेरी पहली नज़र को सलाम !
उमड़ना यूँ तेरा , मचलना युँ तेरा सवेरे,
बन -ठन के बाहर, निकलना युँ तेरा सवेरे.
गूँजते मधुबन में , उन भ्रमर को सलाम !
खिल रहे पानी में उन कँवल को सलाम !
कजरारे नैना तेरे तिरछी नज़र से देखें ,
क़ज़ा जो आ जाए ,बिगड़ी नज़र से देखें .
ढूँढती अरमानों को उस डगर को सलाम ,
तुझको समेटे सपनों में ,ज़िगर को सलाम !
चटपटी हमारे दिल में तुझसे मिलने की,
चटापटी तुझे भी होगी हमसे मिलने की .
'कान्त' हो घायल उस प्रहर को सलाम !
अय साल तेरी बालि सुबह को सलाम !
***
-'कान्त'
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