Monday, 28 December 2015

अलविदा  2015 !

तेरी  याद  हमें  सतायेगी  2015 !
बीतीं क्षण हमें  रुलायेंगी  2015 !

खम-दम   किये  365   दिन  में,
गरिमा   समाई   हमारे  मन  में.

वो  नई  राह  दिखलायेगी  2015 !
नया दीप वो ही जलायेगी  2015 !

तेरे  साथ  हमारा  वक़्त  गुज़रा ,
बहोत कुछ इन्हीं दिनों में सँवरा. 

ये   शक्ति  हमें  बचायेगी  2015 !
तेरी परछाईं  सहलायेगी    2015 !

पराकाष्ठा है  ये  बीते  समय की,
भाल पे लगाये तिलक  मलय की. 

अलविदा ,चिन्ह मिटायेगी  2015 !
'कान्त'  को  गुदगुदायेगी    2015 !
                 ***
-'कान्त'







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