तारक महेता !
उल्टा चश्मा पहनाकर ,चले गए तारक महेता !
हम सबको हँसाकर , चले गए तारक महेता !
निरतिशय मान -सम्मान मिला गुजराती को,
गुर्जरी को ऊँचे उठाकर,चले गए तारक महेता !
मुनशी की तरह, किरदारों को जीवित किया,
मृत्यु की बेंड बजाकर, चले गए तारक महेता !
जेठालाल-दया बहन -टपु सेना के थे सर्जक,
खिचड़ी में घी मिलाकर,चले गए तारक महेता !
उनकी लेखिनी विन्यास ,विनोद-विनीत था,
'कान्त', खिलखिलाकर, चले गए तारक महेता !
***
उल्टा चश्मा पहनाकर ,चले गए तारक महेता !
हम सबको हँसाकर , चले गए तारक महेता !
निरतिशय मान -सम्मान मिला गुजराती को,
गुर्जरी को ऊँचे उठाकर,चले गए तारक महेता !
मुनशी की तरह, किरदारों को जीवित किया,
मृत्यु की बेंड बजाकर, चले गए तारक महेता !
जेठालाल-दया बहन -टपु सेना के थे सर्जक,
खिचड़ी में घी मिलाकर,चले गए तारक महेता !
उनकी लेखिनी विन्यास ,विनोद-विनीत था,
'कान्त', खिलखिलाकर, चले गए तारक महेता !
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