गीत
पायल की छनन छन सुनाई देती है,
नई सुबह मौसम की बधाई देती है !
गुनगुनाती हैं हरी काँच की चूड़ियाँ,
हर गोरी इठलाती दिखाई देती है !
पनघट पे झिलमिलाती हैं खुशियाँ,
सखियाँ कुहरे को बिदाई देती हैं !
चौदवीं रात की चाँदनी आसमान से,
अमृत कुंभ खोलकर मलाई देती है !
ठन्ड़ी ठन्ड़ी हवाएँ,मचलती हैं यहाँ,
मस्त झौंकों को वे चतुराई देती हैं !
ढोलकों पर थाप पड़ती है होली की,
नई नवेली, शगुन की मिठाई देती है !
***
-'कान्त'
पायल की छनन छन सुनाई देती है,
नई सुबह मौसम की बधाई देती है !
गुनगुनाती हैं हरी काँच की चूड़ियाँ,
हर गोरी इठलाती दिखाई देती है !
पनघट पे झिलमिलाती हैं खुशियाँ,
सखियाँ कुहरे को बिदाई देती हैं !
चौदवीं रात की चाँदनी आसमान से,
अमृत कुंभ खोलकर मलाई देती है !
ठन्ड़ी ठन्ड़ी हवाएँ,मचलती हैं यहाँ,
मस्त झौंकों को वे चतुराई देती हैं !
ढोलकों पर थाप पड़ती है होली की,
नई नवेली, शगुन की मिठाई देती है !
***
-'कान्त'
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