Saturday, 25 March 2017

गीत 

पायल की छनन छन सुनाई देती है,
नई  सुबह मौसम की  बधाई देती है !

गुनगुनाती  हैं  हरी काँच की चूड़ियाँ,
हर  गोरी  इठलाती   दिखाई  देती है !

पनघट पे झिलमिलाती हैं  खुशियाँ,
सखियाँ  कुहरे   को   बिदाई  देती हैं !

चौदवीं रात की चाँदनी आसमान से,
अमृत कुंभ  खोलकर मलाई देती  है !

ठन्ड़ी ठन्ड़ी हवाएँ,मचलती हैं  यहाँ,
मस्त झौंकों  को  वे चतुराई  देती हैं ! 

ढोलकों पर थाप पड़ती है  होली  की,
नई नवेली, शगुन की मिठाई देती है !
                      ***
-'कान्त'

                      

       








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