Monday, 7 April 2014

श्री राम वंदना। 

    श्री राम ले अवतार भारत वर्ष में फिर आइये,
     राजीव लोचन चाप की टंकार   घोर सुनाइए !

     महि से  अघों का भार करुणा सिंधु उतारिये,
     प्रतक्ष्य दीनानाथ निज नाम  कर दिखलाइये !

      साहस हमें सुग्रीव सा बल पवनसुत सा दीजिये,
      दशरथ-सुवन,का-पुरुषता, मलीनता हर लीजिये !

      जीवन हमारा धर्ममय हो सुमति ऐसी दीजिये,
      जावें कुपथ पर पग नहीं हिय नेत्र पावन कीजिये !

      यम,दम ,नियम पालें सदा धारि दया गंभीरता,
      संतोष,शील,स्नेह,ममता और समता वीरता !

       वासर,निशा बीतें तुम्हारे ध्यान व गुणगान में ,
       लख दूसरोंका द्रव्य हम भूलें न दुखः की तानमें !

       कीजे कृपा करुणेश हम सब मिल उतारें आरती,
       स्मृति पुराणक शाश्त्र की श्रुति नेति नेति पुकारती!

       प्रकाश  आच्छादित महि चहूँ ओर आज दिख रही,
       'फलक' हृदय से वंदना यह भजन आज लिखा रही !

                                                             -'कान्त'

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