आँसू
मेरी आँख के आँसू भी बोलते हैं ,
दुखः ,दर्द , सपनों को वे तोलते हैं.
गीत के भाव सोते गम के किनारे,
कोई तो पहुंचेगें वहाँ थके-हारे.
तकदीर के फ़साने, यहाँ डोलते हैं ,
दुखः, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
ज्योति में क्यों डूबते हैं ये सितारे ?
बे-असर क्यों हो गए ,प्राण के इशारे ?
मिल चुके वे शून्य में,क्या खोजते हैं ?
दुखः, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
बोल किस लिए चलती पवन पुरवैया ?
मौसमों के गीत का, कौन है गवैया ?
कौन प्रहरी हृदय पट को, खोलते हैं ?
दुःख, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
ध्यान रखना मौन मेरा टूट ना जाये ,
शायरी का साथ कभी छूट ना जाये. .
कलम के अरमान मुझ में बोलते हैं ,
दुखः, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
मेरी आँख के आँसू भी बोलते हैं ,
दुखः ,दर्द , सपनों को वे तोलते हैं.
गीत के भाव सोते गम के किनारे,
कोई तो पहुंचेगें वहाँ थके-हारे.
तकदीर के फ़साने, यहाँ डोलते हैं ,
दुखः, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
ज्योति में क्यों डूबते हैं ये सितारे ?
बे-असर क्यों हो गए ,प्राण के इशारे ?
मिल चुके वे शून्य में,क्या खोजते हैं ?
दुखः, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
बोल किस लिए चलती पवन पुरवैया ?
मौसमों के गीत का, कौन है गवैया ?
कौन प्रहरी हृदय पट को, खोलते हैं ?
दुःख, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
ध्यान रखना मौन मेरा टूट ना जाये ,
शायरी का साथ कभी छूट ना जाये. .
कलम के अरमान मुझ में बोलते हैं ,
दुखः, दर्द, सपनों को वे तोलते हैं.
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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