Friday, 29 May 2015

ग़ज़ल 

आये   हैं    सताने    लोग,
हैं   कितने   बेगाने   लोग !

अपने मन में रब को  पाते,
क्यों  जाते बुतखाने  लोग ?

मिल जाएँ फिर भी न जानें ,
ये   जाने   पहचाने    लोग !

हमें   जब   आश  बँधे  तब,
बन  जाते   अनजाने  लोग !

कब किसी के काम आये हैं ,
ये   सारे    मनमाने    लोग !

रिश्ते  हैं अनमोल  जहाँ  में ,
आ   जाते  समझाने   लोग !

प्रेम  से बड़ा , नशा  नहीं  है,
क्या  पाते   मयखाने  लोग !
                 ***
-'कान्त '








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