ग़ज़ल
आये हैं सताने लोग,
हैं कितने बेगाने लोग !
अपने मन में रब को पाते,
क्यों जाते बुतखाने लोग ?
मिल जाएँ फिर भी न जानें ,
ये जाने पहचाने लोग !
हमें जब आश बँधे तब,
बन जाते अनजाने लोग !
कब किसी के काम आये हैं ,
ये सारे मनमाने लोग !
रिश्ते हैं अनमोल जहाँ में ,
आ जाते समझाने लोग !
प्रेम से बड़ा , नशा नहीं है,
क्या पाते मयखाने लोग !
***
-'कान्त '
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