ग़ज़ल
ये दर्द हम से सहा नहीं जाता,
और चुप भी रहा नहीं जाता।
हम अभी से हो गये बेजार,
बीत रहा है वो कहा नहीं जाता।
किस्मत की खूबी देखो दोस्तो ,
बहाव में भी बहा नहीं जाता।
पहले तो सिर्फ एक ही सितम था,
अब तो ये कारहाहा नहीं जाता।
ज़िंदगी इश्क की अंजुमन है,
चाहनेवालों को चाहा नहीं जाता।
जझबात मेरे आज मचलते हैं ,
सिरहाज का ऊँहुँआहा नहीं जाता।
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-'कान्त '
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ये दर्द हम से सहा नहीं जाता,
और चुप भी रहा नहीं जाता।
हम अभी से हो गये बेजार,
बीत रहा है वो कहा नहीं जाता।
किस्मत की खूबी देखो दोस्तो ,
बहाव में भी बहा नहीं जाता।
पहले तो सिर्फ एक ही सितम था,
अब तो ये कारहाहा नहीं जाता।
ज़िंदगी इश्क की अंजुमन है,
चाहनेवालों को चाहा नहीं जाता।
जझबात मेरे आज मचलते हैं ,
सिरहाज का ऊँहुँआहा नहीं जाता।
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-'कान्त '
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