ग़ज़ल
JNU से आज आवाज़ गद्दारी की आई है,
हीजडे नेताओंने अपनी असलियत दिखाई है।
क्यों चुप हैं अपने आपको मर्द कहनेवाले ?
क्या उनकी भी सिर्फ सत्ता से सगाई है ?
निरंकुश अलगतावादी ताकतों को रोकना होगा,
भारत माँ के बेटों ने अपनी जान गँवाई है।
कैसे लग शकते हैं यहाँ देश विरोधी नारे ?
वज़ीरे आज़म को क्या किसीने चूड़ी पहनाई है ?
जागो ,अब संकीर्ण मानसिकता को छोड़ो ,
अय राष्ट्र के रखवालो तुमको राम दुहाई है।
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-'कान्त '
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