वरदान !
तुम हो मेरे पालनहारे ,
दो मंगल वरदान प्रभु !
जगे मेरा सोया मन,
नहीं चाहिए कोई धन।
मैल आँचल का धोऊँ ,
बस एक यही अरमान।
०दो मंगल
मेरे पथ पर है अँधेरा,
दानवों का मनमें डेरा।
कहाँ करुँ मैं रैन बसेरा,
पथ से हुँ मैं अनजान।
०दो मंगल
सब से हिल मिल के रहुँ ,
औरों की पीड़ा मैं सहूँ।
दीप अच्छाई का मनमें ,
अब जलने दो भगवान।
०दो मंगल
मेरे प्राण सुखों से घायल,
दुःख की पहनी है पायल।
ज्योति में मैं मिल जाऊँ ,
जलने में ही है मेरी शान।
०दो मंगल
***
-'कान्त'
तुम हो मेरे पालनहारे ,
दो मंगल वरदान प्रभु !
जगे मेरा सोया मन,
नहीं चाहिए कोई धन।
मैल आँचल का धोऊँ ,
बस एक यही अरमान।
०दो मंगल
मेरे पथ पर है अँधेरा,
दानवों का मनमें डेरा।
कहाँ करुँ मैं रैन बसेरा,
पथ से हुँ मैं अनजान।
०दो मंगल
सब से हिल मिल के रहुँ ,
औरों की पीड़ा मैं सहूँ।
दीप अच्छाई का मनमें ,
अब जलने दो भगवान।
०दो मंगल
मेरे प्राण सुखों से घायल,
दुःख की पहनी है पायल।
ज्योति में मैं मिल जाऊँ ,
जलने में ही है मेरी शान।
०दो मंगल
***
-'कान्त'
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