ग़ज़ल
दर्दे दिल मैं किसे सुनाऊँ,
ज़ख्म अपने मैं किसे बताऊं ?
तुम तो छोड़कर चले गए,
अब मैं नाज़ से किसे बुलाऊँ ?
गुलशन में शबनम महजूज है,
उसके दामन में किसे लिपटाऊँ ?
किया है प्यार हमने बंदिशों से,
नफऱत के पाठ किसे पढाऊँ ?
ग़ज़लमें बेज़ार शायर मचले,
बज़म में आज , किसे नचाऊँ ?
***
दर्दे दिल मैं किसे सुनाऊँ,
ज़ख्म अपने मैं किसे बताऊं ?
तुम तो छोड़कर चले गए,
अब मैं नाज़ से किसे बुलाऊँ ?
गुलशन में शबनम महजूज है,
उसके दामन में किसे लिपटाऊँ ?
किया है प्यार हमने बंदिशों से,
नफऱत के पाठ किसे पढाऊँ ?
ग़ज़लमें बेज़ार शायर मचले,
बज़म में आज , किसे नचाऊँ ?
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