Sunday, 22 January 2017

ग़ज़ल 

दर्दे   दिल   मैं   किसे    सुनाऊँ,
ज़ख्म   अपने मैं  किसे  बताऊं ?

तुम   तो   छोड़कर    चले  गए,
अब   मैं  नाज़ से किसे  बुलाऊँ ?

गुलशन में शबनम  महजूज है,
उसके दामन में किसे लिपटाऊँ ?

किया है प्यार हमने बंदिशों से,
नफऱत  के  पाठ  किसे  पढाऊँ ?

ग़ज़लमें   बेज़ार शायर  मचले,
बज़म  में  आज , किसे नचाऊँ ?
                  ***














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